बुआ जी के घर के अहसास को जीती हूँ
ऐसे जैसे घूंट घूंट अमृत को पिटी हूँ
कितनी जीवंतता थी , उस काल में
जैसे एक समूचा युग बिट गया हो
और मेरे हाथों से
वो, अतीत रिट गया हो
ऐसे जैसे घूंट घूंट अमृत को पिटी हूँ
कितनी जीवंतता थी , उस काल में
जैसे एक समूचा युग बिट गया हो
और मेरे हाथों से
वो, अतीत रिट गया हो
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