बुआ रहती थी, उनकी सौत , नाम था , नवदीन
नवादीन , नही नवाधीन
नही नवादीन
ये नाम अलग आ रहा है, उसके नाम का मतलब होता है
नई नवेली
वो, बहुत दुखी व् कुछ जिद्दी थी
वो, बुआ जी के एकमात्र पुत्र के अवसान के बाद लाइ गयी थी बुआ जी का बचपन में विवाह हुआ था, कई बरसों तक , औलाद नही हुई , तो बुआजी ने जमीं पर खाना खाया था, वो थाली में नही , जमीं लीपकर उसपर कहती थी, कई बरसों की तपस्या के बाद मिला बीटा, किन्तु रहा सिर्फ ११ बरस, बहुत होनहार, खेल दिखने वाला बीटा था, दोनों हाथो की अंजलि में भरकर पैसे लूटता था जैसे मई तिजोरी पर रखे पैसों को दोनों हाथों की अंजुली में भरकर ले जाती थी, और एक मूर्ति खरीद लती थि…। बुआ जी की सौत आई थी, बेटे के नही रहने पर,
बाबू नाम था , बेटे का, उसे धनुर्वात हुआ था, जिसके लिए जिला अस्पताल में रो रोकर , हमारे बड़े व् ने
फूफा ने डॉक्टर से विनती की थी, पांव पकड़ कर डॉक्टर से कहा था, डॉ साहब,बेटे को , इसके वजन के बराबर पैसे तौलकर देंगे , किन्तु नही बचा पाये,और बुआ जी ने वो दुःख झेल , जो कल्पनातीत है
नवादीन , नही नवाधीन
नही नवादीन
ये नाम अलग आ रहा है, उसके नाम का मतलब होता है
नई नवेली
वो, बहुत दुखी व् कुछ जिद्दी थी
वो, बुआ जी के एकमात्र पुत्र के अवसान के बाद लाइ गयी थी बुआ जी का बचपन में विवाह हुआ था, कई बरसों तक , औलाद नही हुई , तो बुआजी ने जमीं पर खाना खाया था, वो थाली में नही , जमीं लीपकर उसपर कहती थी, कई बरसों की तपस्या के बाद मिला बीटा, किन्तु रहा सिर्फ ११ बरस, बहुत होनहार, खेल दिखने वाला बीटा था, दोनों हाथो की अंजलि में भरकर पैसे लूटता था जैसे मई तिजोरी पर रखे पैसों को दोनों हाथों की अंजुली में भरकर ले जाती थी, और एक मूर्ति खरीद लती थि…। बुआ जी की सौत आई थी, बेटे के नही रहने पर,
बाबू नाम था , बेटे का, उसे धनुर्वात हुआ था, जिसके लिए जिला अस्पताल में रो रोकर , हमारे बड़े व् ने
फूफा ने डॉक्टर से विनती की थी, पांव पकड़ कर डॉक्टर से कहा था, डॉ साहब,बेटे को , इसके वजन के बराबर पैसे तौलकर देंगे , किन्तु नही बचा पाये,और बुआ जी ने वो दुःख झेल , जो कल्पनातीत है
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