Very hard, trembling touch axis of the moon in water,
Well, a stop time so intense, serious though that was the Samadhi of Yogi
LIPA coated nights aunt's home Cbe Home में चन्द्रमा के उजियारे में
Coral , मुनगे के पेड़ की शाखाओं को हिलते देखना, और भय की कोई हिलोर तब मन में नही थि. प्रातः के पहले , अलसुबह का चांदनी का उजाला भी छाँव जैसा होता, इतनी गहन तल्लीनता की, आज भी
Mine ध्यान लग जाता है
Aunt के साथ, उनके पीछे दौड़ती भगति मई थी, बुआ जी अपने काम में लगी होती तब, भी मई उन्हें देखती
When बुआ जी अपने घर के बीच गृह को लिपटी, जब वो सिलबट्टे पर चटनी पीस रही होती, तो, मई ३ वर्षीय
Their भतीजी उनके कंधो पर झूल रही होती, पीठपर लड़ी हुई
Aunt के कामों का वक़्त और मेरा सामने बैठकर, गुरसी की रख का टेस्ट लेने का वक़्त होता, फिर मई सामने की छपरी में लगी अलमारी से एक , तिकोना कांच का खिलौना लाती , और उसमे चूड़ी के टुकड़ों के आकाश
Axis देखा करती। ये मेरा सतरंगी सपनों से पहला साक्षात्कार थ. मैंने महसूस की थी, स्वाधीनता व् स्वाभिमान भरी जिंदगी की गौरव व् दर्प से भरी जिंदगी, जिसे मेरे विवाह के बाद एक झटके से टूटना था, ये नही मालूम था, की बाद में इतना संघर्ष होगा, मुझे सबसे पहला झटका ये लगा, की मुझे वैसा बड़ा सा घर नही मिला, किन्तु, मैंने अपने घर को बसने में कोई कसार।, कस्र कसर बाकि नही राखी बुआ जी के घर मेरे बहुत साथी थे , एक मिट्ठू था, जिसका पिजरा तक मुझे कभी उठाने नही कहा गया , बादमे माँ ने मुझे सब काम सिखाया, किन्तु बड़े घर में रहने और आराम से रहने, यंहा तक की किसी की सेवा करने की आदत नही थी
Whatever सहज स्वभाव था, वो स्वयं से ही सहज रूप से अनुशाशन में रहने का था
से किस ली , ये रे.......
Well, a stop time so intense, serious though that was the Samadhi of Yogi
LIPA coated nights aunt's home Cbe Home में चन्द्रमा के उजियारे में
Coral , मुनगे के पेड़ की शाखाओं को हिलते देखना, और भय की कोई हिलोर तब मन में नही थि. प्रातः के पहले , अलसुबह का चांदनी का उजाला भी छाँव जैसा होता, इतनी गहन तल्लीनता की, आज भी
Mine ध्यान लग जाता है
Aunt के साथ, उनके पीछे दौड़ती भगति मई थी, बुआ जी अपने काम में लगी होती तब, भी मई उन्हें देखती
When बुआ जी अपने घर के बीच गृह को लिपटी, जब वो सिलबट्टे पर चटनी पीस रही होती, तो, मई ३ वर्षीय
Their भतीजी उनके कंधो पर झूल रही होती, पीठपर लड़ी हुई
Aunt के कामों का वक़्त और मेरा सामने बैठकर, गुरसी की रख का टेस्ट लेने का वक़्त होता, फिर मई सामने की छपरी में लगी अलमारी से एक , तिकोना कांच का खिलौना लाती , और उसमे चूड़ी के टुकड़ों के आकाश
Axis देखा करती। ये मेरा सतरंगी सपनों से पहला साक्षात्कार थ. मैंने महसूस की थी, स्वाधीनता व् स्वाभिमान भरी जिंदगी की गौरव व् दर्प से भरी जिंदगी, जिसे मेरे विवाह के बाद एक झटके से टूटना था, ये नही मालूम था, की बाद में इतना संघर्ष होगा, मुझे सबसे पहला झटका ये लगा, की मुझे वैसा बड़ा सा घर नही मिला, किन्तु, मैंने अपने घर को बसने में कोई कसार।, कस्र कसर बाकि नही राखी बुआ जी के घर मेरे बहुत साथी थे , एक मिट्ठू था, जिसका पिजरा तक मुझे कभी उठाने नही कहा गया , बादमे माँ ने मुझे सब काम सिखाया, किन्तु बड़े घर में रहने और आराम से रहने, यंहा तक की किसी की सेवा करने की आदत नही थी
Whatever सहज स्वभाव था, वो स्वयं से ही सहज रूप से अनुशाशन में रहने का था
से किस ली , ये रे.......
ye teri maujudgi thi
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