Saturday, 26 April 2014

तुम्ब 
तुम इतनी नटखट 
ये सरे सारे घर को उलट   हो हो 
न सोती हो , न सोने देती हो सारे घर को 
 उलट पलट करने का ये तुम्हारा फितूर 
ये मेरी किताबे  
 तो पारिजात आने की है 
तुमसे कुछ नही सम्भलता 
 बनाओगी 
दोस्तों के संग बातें  मजाक 
और एक दो की टांग खिचाई 
ये तुम्हारी और तुम्हारी बहनों की 
प्रिय खेल है 
 के किसी कोने में सब अपना सामान dauble
लेकर बैठ जाओगी 
और तुम्हारी हंसी 
 कितनी मधुर 
अरे तुम्हे है कितना सौर 
सौर हमे पता है 
तुम्हारी  राग रग से वाफिक हूँ 
आज से नही 
जमाने से। .... क्या समझती हो, 
अपने अपने आपको। ……। 
घर के इस कोने से वंहा तक 
तेरा ही  है 
संवार ले ये संसार 
और वो भि.... 

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