तुम्ब
तुम इतनी नटखट
ये सरे सारे घर को उलट हो हो
न सोती हो , न सोने देती हो सारे घर को
उलट पलट करने का ये तुम्हारा फितूर
ये मेरी किताबे
तो पारिजात आने की है
तुमसे कुछ नही सम्भलता
बनाओगी
दोस्तों के संग बातें मजाक
और एक दो की टांग खिचाई
ये तुम्हारी और तुम्हारी बहनों की
प्रिय खेल है
के किसी कोने में सब अपना सामान dauble
लेकर बैठ जाओगी
और तुम्हारी हंसी
कितनी मधुर
अरे तुम्हे है कितना सौर
सौर हमे पता है
तुम्हारी राग रग से वाफिक हूँ
आज से नही
जमाने से। .... क्या समझती हो,
अपने अपने आपको। ……।
घर के इस कोने से वंहा तक
तेरा ही है
संवार ले ये संसार
और वो भि....
तुम इतनी नटखट
ये सरे सारे घर को उलट हो हो
न सोती हो , न सोने देती हो सारे घर को
उलट पलट करने का ये तुम्हारा फितूर
ये मेरी किताबे
तो पारिजात आने की है
तुमसे कुछ नही सम्भलता
बनाओगी
दोस्तों के संग बातें मजाक
और एक दो की टांग खिचाई
ये तुम्हारी और तुम्हारी बहनों की
प्रिय खेल है
के किसी कोने में सब अपना सामान dauble
लेकर बैठ जाओगी
और तुम्हारी हंसी
कितनी मधुर
अरे तुम्हे है कितना सौर
सौर हमे पता है
तुम्हारी राग रग से वाफिक हूँ
आज से नही
जमाने से। .... क्या समझती हो,
अपने अपने आपको। ……।
घर के इस कोने से वंहा तक
तेरा ही है
संवार ले ये संसार
और वो भि....
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