बुआ जी का घर
जैसे हवाएं सर सर सर
घर तो था
जैसे आश्मान पर
आसमान पर
और मेरा दिमाग भी था
कुछ आश्मान पर
हमेशा वंहा कुछ न कुछ खेलती
अकेली ही खेलती
साथी थी ,
मेरे संग प्रकृति
और बुआजी
साथ थी
जैसे समूची धरती
क्या बताऊं
कितना सुनाऊँ
कि वो वक्त नही
वो , मेरा अमृत काल था
जो, कुछ बिट गया
कुछ मेरे भीतर
आज भी
जीवन के रूप में
मौजूद है
जैसे हवाएं सर सर सर
घर तो था
जैसे आश्मान पर
आसमान पर
और मेरा दिमाग भी था
कुछ आश्मान पर
हमेशा वंहा कुछ न कुछ खेलती
अकेली ही खेलती
साथी थी ,
मेरे संग प्रकृति
और बुआजी
साथ थी
जैसे समूची धरती
क्या बताऊं
कितना सुनाऊँ
कि वो वक्त नही
वो , मेरा अमृत काल था
जो, कुछ बिट गया
कुछ मेरे भीतर
आज भी
जीवन के रूप में
मौजूद है
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