वक़्त
वक़्त
तुम
तुम
वक़्त वक़्त कभी रुकता नही है , ,जो भगति रहती है , आप
आज मई आपसे अपने लेखन लेखन के अनुभव बता रही हूँ,
अभी मेरी डेल्ही प्रेस से तीन रचनाएँ स्वीकृत , मैंने सोची की
मुझे पैसे मिलेंगे , चेक जो भेजे गए नही पहुंचे , तुम
तो , मुझे समझमे आया बिना जुगाड़मेंट के पैसा नही मिलता ,
पहचान नही है , आप जॉब देखिये , आपको जुगाड़मेंट लगाना होगा
काम जो किया उसका पैसा आना बहुत मुश्किल है
मई इन्ही कहना चाहती हूँ ,की कविता करे , आर्थिक आधार जरूर देखे
तभी सच होंगे , सपने जब आपका सुपोर्ट होगा , नौकरी या व्यव्शाय
फिर अपने कला का शौक भी
वक़्त
तुम
तुम
वक़्त वक़्त कभी रुकता नही है , ,जो भगति रहती है , आप
आज मई आपसे अपने लेखन लेखन के अनुभव बता रही हूँ,
अभी मेरी डेल्ही प्रेस से तीन रचनाएँ स्वीकृत , मैंने सोची की
मुझे पैसे मिलेंगे , चेक जो भेजे गए नही पहुंचे , तुम
तो , मुझे समझमे आया बिना जुगाड़मेंट के पैसा नही मिलता ,
पहचान नही है , आप जॉब देखिये , आपको जुगाड़मेंट लगाना होगा
काम जो किया उसका पैसा आना बहुत मुश्किल है
मई इन्ही कहना चाहती हूँ ,की कविता करे , आर्थिक आधार जरूर देखे
तभी सच होंगे , सपने जब आपका सुपोर्ट होगा , नौकरी या व्यव्शाय
फिर अपने कला का शौक भी
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