Sunday, 25 May 2014

वक़्त
वक़्त 
तुम 
तुम 
वक़्त वक़्त कभी रुकता नही है ,  ,जो भगति रहती है , आप 
 आज मई आपसे अपने लेखन लेखन के अनुभव बता रही हूँ,
अभी मेरी  डेल्ही प्रेस से तीन  रचनाएँ स्वीकृत ,  मैंने सोची की 
मुझे पैसे मिलेंगे ,  चेक जो भेजे गए  नही पहुंचे , तुम 
तो , मुझे समझमे आया  बिना जुगाड़मेंट के पैसा नही मिलता ,
 पहचान नही है , आप जॉब देखिये ,  आपको जुगाड़मेंट लगाना होगा 
 काम जो किया उसका पैसा  आना बहुत मुश्किल है 
मई  इन्ही कहना चाहती हूँ ,की   कविता करे ,  आर्थिक आधार जरूर देखे 
 तभी सच होंगे , सपने जब  आपका सुपोर्ट होगा ,  नौकरी या व्यव्शाय  
फिर अपने कला का शौक भी  

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