ज्यों
ज्यों ज्यों जाने के दिन नजदीक आ रहे है
मैंने संघर्ष बंद कर दिया है खुदको किताबों की दुनिया से ही जोडूंगी
मेरी किताबें छाप रही है इतना ही बहुत है
आने जाने के इस खेल मेमे मुझे जिंदगी उदास कर देती है
किन्तु खुश रहना है , उदाश नही
आज दिनभर आयशा भी बिल्डिंग में नही है, वो एक स्व बरस की बच्ची है जो , उसकी मम्मी के
ऑफिस जाने पर सारा वक़्त सबके साथ खेलती है, उसकी नानी दुबई से आई थी , शायद जाने वाली थी
इश्लीए मेहमानों का अनजाना रहा , आज वंहा सुना है
इन्ही तो जिंदगी है , जन्हा आज मेले लगते है
कल वंहा सुनसान लगता है
मौसम बदलते है
ज्यों ज्यों जाने के दिन नजदीक आ रहे है
मैंने संघर्ष बंद कर दिया है खुदको किताबों की दुनिया से ही जोडूंगी
मेरी किताबें छाप रही है इतना ही बहुत है
आने जाने के इस खेल मेमे मुझे जिंदगी उदास कर देती है
किन्तु खुश रहना है , उदाश नही
आज दिनभर आयशा भी बिल्डिंग में नही है, वो एक स्व बरस की बच्ची है जो , उसकी मम्मी के
ऑफिस जाने पर सारा वक़्त सबके साथ खेलती है, उसकी नानी दुबई से आई थी , शायद जाने वाली थी
इश्लीए मेहमानों का अनजाना रहा , आज वंहा सुना है
इन्ही तो जिंदगी है , जन्हा आज मेले लगते है
कल वंहा सुनसान लगता है
मौसम बदलते है
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