उम्र के इस पड़ाव प्र मैने संघर्ष किय है
संघर्ष किया है तो इश्लीए कि मेरे सँग राही
मेरे घर गाँव व बेटे कि शक्ति
उम्र के इस छोर प्र पार मेर मेरा मुंबई आना
किसीको नही पसन्द था
फिरभी मैने अवसर लिय लिया
मेरा बेटा नही सामंजस्य क्र सका इन्हा
और बेटे के ठीक होते हि
वो, गाँव लौटना चाहता है
मेरे पास है , मेरे साहित्य कि दुनीया
कंही भि सामंजस्य न्हि क्र पणे कि वज्ह
संघर्ष किया है तो इश्लीए कि मेरे सँग राही
मेरे घर गाँव व बेटे कि शक्ति
उम्र के इस छोर प्र पार मेर मेरा मुंबई आना
किसीको नही पसन्द था
फिरभी मैने अवसर लिय लिया
मेरा बेटा नही सामंजस्य क्र सका इन्हा
और बेटे के ठीक होते हि
वो, गाँव लौटना चाहता है
मेरे पास है , मेरे साहित्य कि दुनीया
कंही भि सामंजस्य न्हि क्र पणे कि वज्ह
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