Friday, 9 May 2014

उम्र के इस पड़ाव प्र मैने संघर्ष किय है 
संघर्ष किया है तो इश्लीए कि मेरे सँग राही 
मेरे घर गाँव व बेटे कि शक्ति 
उम्र के इस छोर प्र पार मेर मेरा मुंबई आना 
किसीको नही पसन्द था 
फिरभी मैने अवसर लिय लिया 
मेरा बेटा नही सामंजस्य क्र सका इन्हा 
और बेटे के ठीक होते हि 
वो, गाँव लौटना चाहता है 
मेरे पास है , मेरे साहित्य कि दुनीया 
कंही भि सामंजस्य न्हि क्र पणे कि वज्ह 

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