जीविका
व् जीवन का संघर्ष
करना ही होगा
इससे कोई नही बच सकता
आप कितनी भी कविता कर लो
कंही किसी बालिका की इज्जत लुटती है
कोई स्त्री मारी जाती है
उसका जीवन शव बन जाता है
तब कविता भी बेमानी हो जाती है
दुःख सभी के है
व् जीवन का संघर्ष
करना ही होगा
इससे कोई नही बच सकता
आप कितनी भी कविता कर लो
कंही किसी बालिका की इज्जत लुटती है
कोई स्त्री मारी जाती है
उसका जीवन शव बन जाता है
तब कविता भी बेमानी हो जाती है
दुःख सभी के है
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