Sunday, 27 December 2015
aangan: आज माँ को मैंने बताई माँ मई ५४ क हो गयी माँ ने न...
aangan: आज माँ को मैंने बताई माँ मई ५४ क हो गयी
माँ ने न...: आज माँ को मैंने बताई माँ मई ५४ क हो गयी माँ ने नही पता क्या महसूस किया होगा वो, तो , अपनी तकलीफ से परेशान रहती है, उसे बहुत ठण्ड लगती ...
माँ ने न...: आज माँ को मैंने बताई माँ मई ५४ क हो गयी माँ ने नही पता क्या महसूस किया होगा वो, तो , अपनी तकलीफ से परेशान रहती है, उसे बहुत ठण्ड लगती ...
आज माँ को मैंने बताई माँ मई ५४ क हो गयी
माँ ने नही पता क्या महसूस किया होगा
वो, तो , अपनी तकलीफ से परेशान रहती है, उसे बहुत ठण्ड लगती है
मुझे माँ से कहते हुए बुआजी की याद आ गयी, और आवाज रुंध गयी
एक पल लगा बुआ जी तुम एक पल को मील जाती तो पर
हम चाहे जो कर ले अपनों से बिछड़ों को नही पा सकते
जो, चले गए है, हम उन्हें लौटा नही सकते
इश्लीए जिनके साथ आज है , उनकी परवाह करे
क्या पता वक़्त के इस तेज़ बहाव में वो, दूर चले गए , हमसे बिछा गए तो, हम उन्हें नही धुंध ढूंढ सकेंगे
बुआ जी तुम एक पल को आ जाती तो,
वंही हटा हट्टा का घर होता तो, बुआ जी, हम सब कितनी ख़ुशी से रहते
मम्मी वंही छोटी सी जागेश्वरी आपके कन्धों पर लदी बिसूरती होती थी
बुआ जी, और धीरोजा के जाने के बाद मेरे नखरे उठाने वाले अब नही है फिरभी
जो, मेरे साथ है, मई उन सबका तहेदिल से सम्मान करती हूँ , और सबको बहुत चाहती हूँ
क्यूंकि, हमारे अपने स्वजन हममे ईश्वर ने प्रदान किये है , हमे प्रभु के उपहारों के लिए उसका शुक्रिया हमेशा दिल से करना चाहिए , आओ, हम उस रा का धन्यवाद के, उसने हमे जो साथी दिए है, उन सको चाहे
क्यूंकि, एक नियत समय के लिए ही हम साथ है, वरना काल के परवाह में जाने कान्हा जायेंगे
फिर भी प्रभु से प्रार्थना करते है, की हम सभी साथ रहे , कही हमारे अपने हमसे अलग न हो
माँ ने नही पता क्या महसूस किया होगा
वो, तो , अपनी तकलीफ से परेशान रहती है, उसे बहुत ठण्ड लगती है
मुझे माँ से कहते हुए बुआजी की याद आ गयी, और आवाज रुंध गयी
एक पल लगा बुआ जी तुम एक पल को मील जाती तो पर
हम चाहे जो कर ले अपनों से बिछड़ों को नही पा सकते
जो, चले गए है, हम उन्हें लौटा नही सकते
इश्लीए जिनके साथ आज है , उनकी परवाह करे
क्या पता वक़्त के इस तेज़ बहाव में वो, दूर चले गए , हमसे बिछा गए तो, हम उन्हें नही धुंध ढूंढ सकेंगे
बुआ जी तुम एक पल को आ जाती तो,
वंही हटा हट्टा का घर होता तो, बुआ जी, हम सब कितनी ख़ुशी से रहते
मम्मी वंही छोटी सी जागेश्वरी आपके कन्धों पर लदी बिसूरती होती थी
बुआ जी, और धीरोजा के जाने के बाद मेरे नखरे उठाने वाले अब नही है फिरभी
जो, मेरे साथ है, मई उन सबका तहेदिल से सम्मान करती हूँ , और सबको बहुत चाहती हूँ
क्यूंकि, हमारे अपने स्वजन हममे ईश्वर ने प्रदान किये है , हमे प्रभु के उपहारों के लिए उसका शुक्रिया हमेशा दिल से करना चाहिए , आओ, हम उस रा का धन्यवाद के, उसने हमे जो साथी दिए है, उन सको चाहे
क्यूंकि, एक नियत समय के लिए ही हम साथ है, वरना काल के परवाह में जाने कान्हा जायेंगे
फिर भी प्रभु से प्रार्थना करते है, की हम सभी साथ रहे , कही हमारे अपने हमसे अलग न हो
Friday, 25 December 2015
Wednesday, 23 December 2015
Tuesday, 22 December 2015
vnha mhua jhrta tha: vnha mhua jhrta tha
vnha mhua jhrta tha: vnha mhua jhrta tha: घर के पीछे अमराई के छोर पर था ,एक महुए का पेड़, जो जाड़ों में लदब्दा के फलता था, और उससे बहुत से महुए गिरते थे.तब भोर के पहले मुंह अँधेरे एक...
Monday, 21 December 2015
Saturday, 19 December 2015
Friday, 18 December 2015
खेल मेरे थे जो प्यारे
जिंदगी के थे , जो सहारे
छूटे जन्हा थे किनारे
अब हम किसको पुकारे
हुए बेसहारे
प्रभु तुम ही तारे
धरती से पहुंचे
तो, बनके तारे
वंही रहेंगे तुम जब हम देखा करेंगे
माघ की ठिठुरती रातों में
वे साथ जाने कहा गए
दीदी का फ़ोन आया की
भोला , मेरा छोटा ममेरा भाई नही रहा
उसकी बाईपास सर्जरी हुई थी बहुत रोता था बहुत
तकलीफ होती थिचाले गया हमारे मां जी भी ऐसे ही अचानक चले गए थे
कहा. चले जाते है, हाड़मांस के पिजर
ये सब, उड़के किश देश चले जाते है नही पता ढूंढा करेंगे आसमान के तारों में
जादू की निर्जन रातों में
जिंदगी के थे , जो सहारे
छूटे जन्हा थे किनारे
अब हम किसको पुकारे
हुए बेसहारे
प्रभु तुम ही तारे
धरती से पहुंचे
तो, बनके तारे
वंही रहेंगे तुम जब हम देखा करेंगे
माघ की ठिठुरती रातों में
वे साथ जाने कहा गए
दीदी का फ़ोन आया की
भोला , मेरा छोटा ममेरा भाई नही रहा
उसकी बाईपास सर्जरी हुई थी बहुत रोता था बहुत
तकलीफ होती थिचाले गया हमारे मां जी भी ऐसे ही अचानक चले गए थे
कहा. चले जाते है, हाड़मांस के पिजर
ये सब, उड़के किश देश चले जाते है नही पता ढूंढा करेंगे आसमान के तारों में
जादू की निर्जन रातों में
Tuesday, 10 November 2015
Friday, 6 November 2015
जब भी गांव में फोन पर भाई से बातें करती हूँ माँ हमेशा कहती है
जागेश्वरी है क्या
माँ को बहुत तकलीफ है
कहती है, उठा नही जाता
बहुत मुस्किल से उठती है
भीतर कंही सलता है दर्द
मई माँ का कोई इलाज नही बता सकती बस
उसकी बातें सुनकर खामोश हो जाती हूँ
किसी का दोष नहीं है
सब वक़्त की बात है
कभी माँ हम ७ बच्चों के लिए तीज-त्यौहार में पकवान बनाती थी
सबके बिस्तर की चादरें धुलवाती थी आज
वो , बिस्तर पर फ़टे कपड़ों में सिमटी रहती है
माँ तुम इतनी उदाश और बेबस कैसे हो गयी हम सब बहन-भाइयों का
विवाह कर हमारा घर बसने वाली तुम आज इतनी दुःख में क्यों लथड़ी हो ,
माँ।
जागेश्वरी है क्या
माँ को बहुत तकलीफ है
कहती है, उठा नही जाता
बहुत मुस्किल से उठती है
भीतर कंही सलता है दर्द
मई माँ का कोई इलाज नही बता सकती बस
उसकी बातें सुनकर खामोश हो जाती हूँ
किसी का दोष नहीं है
सब वक़्त की बात है
कभी माँ हम ७ बच्चों के लिए तीज-त्यौहार में पकवान बनाती थी
सबके बिस्तर की चादरें धुलवाती थी आज
वो , बिस्तर पर फ़टे कपड़ों में सिमटी रहती है
माँ तुम इतनी उदाश और बेबस कैसे हो गयी हम सब बहन-भाइयों का
विवाह कर हमारा घर बसने वाली तुम आज इतनी दुःख में क्यों लथड़ी हो ,
माँ।
Thursday, 5 November 2015
Sunday, 1 November 2015
Friday, 30 October 2015
Saturday, 24 October 2015
Friday, 23 October 2015
Wednesday, 21 October 2015
Monday, 7 September 2015
कल, रात मामा जी नही रहे
मुझे बचपन के याद आये , जब हम सभी मामा-गांव जाते थे, गर्मियों में
वंहा मां जी भी अपने परिवार सहित आते थे, बहुत अच्छे थे वे, बाहर वे सर्विस करते थे
शांत स्वाभाव के, और मुस्कराकर बातें करते थे
मेरा था,
बुआ घर से माँ के घर जाती थी, ज्यादातर पेंट शर्ट पहनती और ,मेरे घुंगराले बाल , मेरे माथे पर ऐसे बिखरते की, आँखे आँखे तक ढक जाती थी, अपनी बिखरी घुंगराली लटों से झांकती मेरी तेज बड़ी बड़ी आँखें,दीदी बताती चिल्लाती थी , से बालों को नही ,
सारे वक़्त हाथों धनुष-बाण लेकर खेलना, यूँ ,रामलीला की नकल करना , और राधेश्याम के दोहे बोलना, ये थे , मेरे शौक
माँ रोटी सिखाती थी , वो, पहले बोलती, एक लाइन लाइन मई दूसरी लाइन बोलती थी
माँ कहती , -शुद्धि करो, …। मई कहती ---शुद्ध काम
माँ कहती --- भक्ति करो , मई ----भगवत मिले
माँ---युक्ति करो , मई कहती ---आदर मिले मिले
माँ कहती -----भगति के ----, मई जोरो से चिल्लाकर कहती ----भक्ति जगधाम
वाकई वे
मुझे बचपन के याद आये , जब हम सभी मामा-गांव जाते थे, गर्मियों में
वंहा मां जी भी अपने परिवार सहित आते थे, बहुत अच्छे थे वे, बाहर वे सर्विस करते थे
शांत स्वाभाव के, और मुस्कराकर बातें करते थे
मेरा था,
बुआ घर से माँ के घर जाती थी, ज्यादातर पेंट शर्ट पहनती और ,मेरे घुंगराले बाल , मेरे माथे पर ऐसे बिखरते की, आँखे आँखे तक ढक जाती थी, अपनी बिखरी घुंगराली लटों से झांकती मेरी तेज बड़ी बड़ी आँखें,दीदी बताती चिल्लाती थी , से बालों को नही ,
सारे वक़्त हाथों धनुष-बाण लेकर खेलना, यूँ ,रामलीला की नकल करना , और राधेश्याम के दोहे बोलना, ये थे , मेरे शौक
माँ रोटी सिखाती थी , वो, पहले बोलती, एक लाइन लाइन मई दूसरी लाइन बोलती थी
माँ कहती , -शुद्धि करो, …। मई कहती ---शुद्ध काम
माँ कहती --- भक्ति करो , मई ----भगवत मिले
माँ---युक्ति करो , मई कहती ---आदर मिले मिले
माँ कहती -----भगति के ----, मई जोरो से चिल्लाकर कहती ----भक्ति जगधाम
वाकई वे
Saturday, 29 August 2015
Wednesday, 26 August 2015
Sunday, 23 August 2015
Thursday, 20 August 2015
Wednesday, 19 August 2015
Friday, 31 July 2015
Saturday, 23 May 2015
माँ
माँ
तुम
घर का एक
जिन्दा कोना हो
कल, जब तुमने
मुझे फोन कर कहा की इतनी
इतनी गर्मी में
तुम १५ दिन से नही नही ,नहायी हो क्यूंकि
तुम व्हील चेयर पर हो
और तुम्हे
कोई नहाने पानी नही देता
क्यूंकि
तुम्हारे कपड़े
निचोड़ने से वो
बचते है
माँ,
मुझे उस माँ की याद आ रही है
जिसे उसके बेटे बहु ने
निकल दिए थे
और वो,
अपनी फूस की झोपडी में
मृत पाई गयी थी
क्योंकि
जलकर मर गयी थी
माँ
तुम माँ क्यों हो
क्यों तुमसे
तुम्हारे बच्चों को
इतनी विरक्ति है
जबकि
आज भी
हमे देखकर
तुम्हारी आँखों में
वैसी ही चमक आ जाती है जैसे बचपन में
आती थी
माँ
तुम
घर का एक
जिन्दा कोना हो
कल, जब तुमने
मुझे फोन कर कहा की इतनी
इतनी गर्मी में
तुम १५ दिन से नही नही ,नहायी हो क्यूंकि
तुम व्हील चेयर पर हो
और तुम्हे
कोई नहाने पानी नही देता
क्यूंकि
तुम्हारे कपड़े
निचोड़ने से वो
बचते है
माँ,
मुझे उस माँ की याद आ रही है
जिसे उसके बेटे बहु ने
निकल दिए थे
और वो,
अपनी फूस की झोपडी में
मृत पाई गयी थी
क्योंकि
जलकर मर गयी थी
माँ
तुम माँ क्यों हो
क्यों तुमसे
तुम्हारे बच्चों को
इतनी विरक्ति है
जबकि
आज भी
हमे देखकर
तुम्हारी आँखों में
वैसी ही चमक आ जाती है जैसे बचपन में
आती थी
Tuesday, 19 May 2015
Sunday, 17 May 2015
आज अचानक गांव चली गयी
बचपन का गांव
जैसे पीपल की छाँव
कुछ पुराने पथराए चेहरों पर
फूटी एक हंसी की किरण
भींग गया मन
जैसे हो, झरने की फुहार
ऐसा था
रसभीना
मेरे अपनों का प्यार
कुछ पल को सब, नतमस्तक थे
जैसे मई अपने पुराने
ऐश्वर्या को पा रही थी
किन्तु वो विगत था
आज मेरे पास संघर्ष है
आगत के लिए
लगी रहहति हूँ
जी जान से
फिर भी
पाकर उस पुराने स्नेह मान को
मन, भर गया था
ओजस्वी अभिमान से
बचपन का गांव
जैसे पीपल की छाँव
कुछ पुराने पथराए चेहरों पर
फूटी एक हंसी की किरण
भींग गया मन
जैसे हो, झरने की फुहार
ऐसा था
रसभीना
मेरे अपनों का प्यार
कुछ पल को सब, नतमस्तक थे
जैसे मई अपने पुराने
ऐश्वर्या को पा रही थी
किन्तु वो विगत था
आज मेरे पास संघर्ष है
आगत के लिए
लगी रहहति हूँ
जी जान से
फिर भी
पाकर उस पुराने स्नेह मान को
मन, भर गया था
ओजस्वी अभिमान से
Sunday, 10 May 2015
मृदुला मैडम जी
नमस्ते
आपसे रोज ही बातें होती है
किन्तु, फोन पर आपकी बात
काटकर, या आपको बीच में
रोककर नही कह पाती
कि , आप प्लीज् मेरी स्क्रिप्ट
रजिस्टर्ड पार्सल से
लौटा दीजिये
मई आपको अपना पता दूंगी
कृतज्ञ
जोगेश्वरी , (विनम्र निवेदन )
मेरा पता है
जोगेश्वरी सधीर , लेखिका
c/o नामदेव् साहू , अधिवक्ता
वार्ड नम्बर ३३
हरिओम नगर
बालाघाट , मप्र ४८१००१
आप डाक से ही भेजिए ,
यंहा कुरियर नही पहुंचेगा
या मुझे डिटेल लिखना होगा
नमस्ते
आपसे रोज ही बातें होती है
किन्तु, फोन पर आपकी बात
काटकर, या आपको बीच में
रोककर नही कह पाती
कि , आप प्लीज् मेरी स्क्रिप्ट
रजिस्टर्ड पार्सल से
लौटा दीजिये
मई आपको अपना पता दूंगी
कृतज्ञ
जोगेश्वरी , (विनम्र निवेदन )
मेरा पता है
जोगेश्वरी सधीर , लेखिका
c/o नामदेव् साहू , अधिवक्ता
वार्ड नम्बर ३३
हरिओम नगर
बालाघाट , मप्र ४८१००१
आप डाक से ही भेजिए ,
यंहा कुरियर नही पहुंचेगा
या मुझे डिटेल लिखना होगा
aangan: माँ तुम हो नम आँखों का धुंवा यादों का है कोई भ...
aangan: माँ
तुम हो नम आँखों का धुंवा
यादों का है
कोई भ...: माँ तुम हो नम आँखों का धुंवा यादों का है कोई भरा हुआ कुंवा जिसे नही झांकता है कोई पर माँ तुम वो, हो जो, उन आवाजों को महसूस...
तुम हो नम आँखों का धुंवा
यादों का है
कोई भ...: माँ तुम हो नम आँखों का धुंवा यादों का है कोई भरा हुआ कुंवा जिसे नही झांकता है कोई पर माँ तुम वो, हो जो, उन आवाजों को महसूस...
माँ
तुम हो नम आँखों का धुंवा
यादों का है
कोई भरा हुआ कुंवा
जिसे नही झांकता है कोई
पर माँ
तुम वो, हो
जो, उन आवाजों को
महसूस करती हो
आज तक
उदाश आँखों में
सामने तपती दोपहरी में
आँगन का उदास कोना
जैसे कंही सुस्त रहा हो
सिपहिया पक्षी
माँ
तुम नही बनाती हो
आचार पर
महसूस करती हो
उसे कहते हुए
मेरे चटखारे लेते ओठों को
माँ
तुम रोज बुलाती हो , मुझे
और भोर से उठकर
तकती हो राह
माँ
अलगनी पर
यूँ ही सूखते
तुम्हारे उतारे हुए
बिना धोये कपडे
हफ्तों हमारी उपेक्षा पर
हिकारत से पड़े रहते है
माँ
क्यों तुम
हमारे लिए
दुनिया की
सबसे बेकार
गयी गुजरी वास्तु हो
तुम हो नम आँखों का धुंवा
यादों का है
कोई भरा हुआ कुंवा
जिसे नही झांकता है कोई
पर माँ
तुम वो, हो
जो, उन आवाजों को
महसूस करती हो
आज तक
उदाश आँखों में
सामने तपती दोपहरी में
आँगन का उदास कोना
जैसे कंही सुस्त रहा हो
सिपहिया पक्षी
माँ
तुम नही बनाती हो
आचार पर
महसूस करती हो
उसे कहते हुए
मेरे चटखारे लेते ओठों को
माँ
तुम रोज बुलाती हो , मुझे
और भोर से उठकर
तकती हो राह
माँ
अलगनी पर
यूँ ही सूखते
तुम्हारे उतारे हुए
बिना धोये कपडे
हफ्तों हमारी उपेक्षा पर
हिकारत से पड़े रहते है
माँ
क्यों तुम
हमारे लिए
दुनिया की
सबसे बेकार
गयी गुजरी वास्तु हो
Thursday, 7 May 2015
Tuesday, 5 May 2015
Sunday, 3 May 2015
aangan: To ask from you,Kaun ho tum So, it will not be a...
aangan: To ask from you,
Kaun ho tum
So, it will not be a...: To ask from you, Kaun ho tum So, it will not be a question Tedha You can be a restless soul Cycle in which the fingers Bissau Padm...
Kaun ho tum
So, it will not be a...: To ask from you, Kaun ho tum So, it will not be a question Tedha You can be a restless soul Cycle in which the fingers Bissau Padm...
aangan: आँगनआँगन का मतलब है माँ जो, कभी ये अहसान नही ब...
aangan: आँगन
आँगन का मतलब है
माँ
जो, कभी ये
अहसान नही ब...: आँगन आँगन का मतलब है माँ जो, कभी ये अहसान नही बताती की, मैंने तुम्हे जन्म दिया है तो, तुम मेरे लिए कुछ करो मेरा आँगन मेरे ब...
आँगन का मतलब है
माँ
जो, कभी ये
अहसान नही ब...: आँगन आँगन का मतलब है माँ जो, कभी ये अहसान नही बताती की, मैंने तुम्हे जन्म दिया है तो, तुम मेरे लिए कुछ करो मेरा आँगन मेरे ब...
Tuesday, 28 April 2015
Monday, 27 April 2015
Saturday, 25 April 2015
Sunday, 5 April 2015
Tuesday, 24 March 2015
Monday, 23 March 2015
Friday, 20 March 2015
Thursday, 19 March 2015
Tuesday, 17 March 2015
Sunday, 15 March 2015
Saturday, 14 March 2015
Wednesday, 4 March 2015
Tuesday, 3 March 2015
माँ
माँ कितने भजन जानती व् गाती है
अद्भुत है, उसका ज्ञान,
कबीर के वो भजन तो, आज के शोध-छात्र भी नही जानते जो माँ
गाती है माने
माँ ने कल, अचानक गाना शुरू किया
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले
माँ से मैंने पुछि
माँ , वो मराठी की कविता सुना न
जो, कोयल पर है
माँ ने कुछ गए कर कही मैंने ऐसे लिखी
श्लोक --येथे , समस्त बहरे बसतात , का भासने कोकिल वर्ण बहूनि ..........
माँ ने इस श्लोक का अर्थ भी बताई, जो मैंने लिखी
हे कोकिला , तू इतनी मीठी आवाज में क्यों गाती है , यंहा तो ,
सभी बहरे बसते है , तो, तेरे काले रंग पर हँसते है , वो , तेरी
मीठी आवाज को क्या जानेंगे ,. ये कोकिला इतनी मधुर आवाज कहूँ काढ़ते ,
ये तुला काला रंग पाहून कौआ मानते
मेरी अल्प-शिक्षित संस्कृत-हिंदी व् मराठी में जो भावार्थ कहकर सुनाया, तब मई
चकित रह गयी, की माँ कितनी तेज है , काव्य कहने व् गीत गाने में। …
माँ ने बताई , उसके पिता अर्थात मेरे नाना घर में हमेशा जब भी पंगत करते, पंगत
बैठने पर माँ को बुलाते, जो, ७ या ८ बरस की थी, और वो, ये श्लोक भावार्थ सहित कहती थी ये
ये मराठी की बहुत ही प्यारी कविता भी है
माँ कितने भजन जानती व् गाती है
अद्भुत है, उसका ज्ञान,
कबीर के वो भजन तो, आज के शोध-छात्र भी नही जानते जो माँ
गाती है माने
माँ ने कल, अचानक गाना शुरू किया
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले
माँ से मैंने पुछि
माँ , वो मराठी की कविता सुना न
जो, कोयल पर है
माँ ने कुछ गए कर कही मैंने ऐसे लिखी
श्लोक --येथे , समस्त बहरे बसतात , का भासने कोकिल वर्ण बहूनि ..........
माँ ने इस श्लोक का अर्थ भी बताई, जो मैंने लिखी
हे कोकिला , तू इतनी मीठी आवाज में क्यों गाती है , यंहा तो ,
सभी बहरे बसते है , तो, तेरे काले रंग पर हँसते है , वो , तेरी
मीठी आवाज को क्या जानेंगे ,. ये कोकिला इतनी मधुर आवाज कहूँ काढ़ते ,
ये तुला काला रंग पाहून कौआ मानते
मेरी अल्प-शिक्षित संस्कृत-हिंदी व् मराठी में जो भावार्थ कहकर सुनाया, तब मई
चकित रह गयी, की माँ कितनी तेज है , काव्य कहने व् गीत गाने में। …
माँ ने बताई , उसके पिता अर्थात मेरे नाना घर में हमेशा जब भी पंगत करते, पंगत
बैठने पर माँ को बुलाते, जो, ७ या ८ बरस की थी, और वो, ये श्लोक भावार्थ सहित कहती थी ये
ये मराठी की बहुत ही प्यारी कविता भी है
Wednesday, 28 January 2015
Tuesday, 27 January 2015
Saturday, 24 January 2015
Thursday, 15 January 2015
Tuesday, 13 January 2015
Monday, 12 January 2015
Sunday, 11 January 2015
Saturday, 10 January 2015
आँगन को
आँगन को
पाठकों का इतना प्यार मिला है
की इसने , बनारस की बयार को पीछे छोड़ दिया है
वो, महिला जो,
सड़कों पर घूमती हुयी
भीख मांगती है
अपने बूढ़े हाथों में झोली टांगे
शहर के मोहल्ले भटकती है
उसे हे राम कहते सुना है
और वो , मंदिर के बाहर भी बैठी थी
कि उसका कोई घर नही है
वो , ऐसे ही पीले रंग की साड़ी पहने होती है
जाने किस गांव से लौटी है
इस शहर में अपने वजूद को बचाने
जन्हा, उसका अपना कोई नहीं है
यदि है, तो बीएस ,
उसके जैसे दूसरे भीख मांगने वाले
जिनके पास कोई वोटर कार्ड नही है
इश्लीए, वो, भूखे नंगे अपना वजूद बचाने घूम रहे है उधजर वो, है
उधर वो, है
जो, सरकार से अरबों का कर्ज लेकर भी
सरकारों से माफ़ी की भीख मांग रहे है
कितनी, असमानता है
हमारे सभ्य देशों में
आँगन को
पाठकों का इतना प्यार मिला है
की इसने , बनारस की बयार को पीछे छोड़ दिया है
वो, महिला जो,
सड़कों पर घूमती हुयी
भीख मांगती है
अपने बूढ़े हाथों में झोली टांगे
शहर के मोहल्ले भटकती है
उसे हे राम कहते सुना है
और वो , मंदिर के बाहर भी बैठी थी
कि उसका कोई घर नही है
वो , ऐसे ही पीले रंग की साड़ी पहने होती है
जाने किस गांव से लौटी है
इस शहर में अपने वजूद को बचाने
जन्हा, उसका अपना कोई नहीं है
यदि है, तो बीएस ,
उसके जैसे दूसरे भीख मांगने वाले
जिनके पास कोई वोटर कार्ड नही है
इश्लीए, वो, भूखे नंगे अपना वजूद बचाने घूम रहे है उधजर वो, है
उधर वो, है
जो, सरकार से अरबों का कर्ज लेकर भी
सरकारों से माफ़ी की भीख मांग रहे है
कितनी, असमानता है
हमारे सभ्य देशों में
Wednesday, 7 January 2015
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